Monday, May 21, 2012

राजीव गांधी की हत्या


आचार्य श्री तुलसी -
राजीव गांधी की हत्या
" भारतीयता को चुनौती "
२१ मई १९९१ !
भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई |
हत्या का समाचार मिलने पर मैंने कहा -
" राजीव गांधी की हत्या ने एक बार फिर भारतीयता को चुनौती दी है |
जो भारत अध्यात्मगुरु था,
जहां अहिंसा का उदभव हुआ था
और जहां स्वतंत्रता की लड़ाई में अहिंसा का शौर्य प्रकट हुआ था,
वहां इस प्रकार की नृशंस घटना से क्या भारत का सिर शर्म से झुक नहीं जाता है ?
वर्तमान में हिंसा और आतंक के प्रति जो रुझान बढ़ता जा रहा है,
वह सचमुच ही चिंतनीय है |
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि समस्या का समाधान हिंसा और हत्या में खोजा जा रहा है |
यह निश्चित है कि इस प्रकार की घटनाओं से कोई समाधान नहीं मिलता |
बल्कि हिंसा का उन्माद जो अन्धता पैदा कर रहा है,
उसका उपाय फिर खोजना होगा | "
राजीवजी के बारे में अपनी बात को आगे बढाते हुए मैंने कहा -
" राजीव गांधी शालीन, विनम्र और राष्ट्रहित के समर्पित व्यक्ति थे |
भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में में
और प्रधानमन्त्री के रूप में उन्होंने राष्ट्र को अपनी सेवाएं अर्पित कीं |
उनके मन में बड़ी कल्पनाएं थीं कि
इक्कीसवीं सदी में हमारा प्रवेश एक शक्तिसंपन्न और उन्नत राष्ट्र के रूप में होगा |
उनसे भी राष्ट्र को बहुत आशाएं और अपेक्षाएं थीं,
किन्तु नियति को यह मान्य नहीं था |
असमय में ही वे राष्ट्र की गोद से बिछुड गए |"
हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा नहीं है,
इस शाश्वत सत्य का सन्देश देते हुए मैंने कहा -
" इस स्थिति में उत्तेजनापूर्ण वातावरण अस्वाभाविक नहीं है |
किन्तु सभी राजनीतिक दल और जनता इस उत्तेजना को शान्ति और सदभाव में बदलने का प्रयत्न करें
तथा स्थिति को और अधिक जटिल न् बनने दें |
अतीत से बोधपाठ लेकर भविष्य को कैसे अधिक उज्जवल बनायें,
इस पर ध्यान केंद्रित करें |"
नोट - यह अहिंसा के महान पुजारी आचार्य श्री तुलसी का देश के नेता की हिंसक हत्या पर दिया गया वक्तव्य है |
कृपया इसे राजनीति से न् जोड़ें |