श्राद्ध
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जिज्ञासा:
जैन धर्म मे श्राद्ध मान्य नहीं हैं, क्यों?
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उत्तर: बहुत से जैन लोगों के प्रश्न हैं
कि श्राद्ध मानें या नहीं?
जैन धर्म श्रमण संस्कृति को मानता है,
वैदिक संस्कृति मे श्राद्ध मानते हैं।
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हिन्दु धर्म और जैन धर्म अलग हैं।
बहुत से जैन समझते हैं
कि हम हिन्दु हैं।
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जैन धर्म कर्म प्रधान है।
जैसे कर्म वैसी गति।
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पिंड दान करने से या कौवे को खिलाने से
क्या वो दान पहुंच जाता है,
यह बात समझ से बाहर है।
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करुणा तो जैन धर्म का गहना (आभूषण) है।
महावीर प्रभु के रग-रग मे करुणा थी जगत के लिए।
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पूर्वज कोई देव नहीं हैं,
जैसी उनके कर्म हैं वैसी उनकी गति।
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पूर्वज को पूजा नहीं जाता,
सिर्फ उन्हें प्रणाम किया जाता है ।