आनाल एनक्कू तमिल तेरीयाद !
आदांनाल हिंदी यिलं पेसूकिरन !!
भाषा बाधक नहीं बनी !!!
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तमिलनाडु यात्रा के पूर्व मोरारजी देसाई ने आचार्यश्री को निवेदन किया -
दक्षिण में हिंदी का विरोध प्रखर हो रहा है |
इसलिए आप वहां कोई सार्वजनिक कार्यक्रम न करें |
कहीं ऐसा न हो कि
आपका वहां हिंदी भाषण सुनकर छात्र भड़क उठे |
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अन्नामलै विश्वविद्दालय के प्रोफेसरों के अनुरोध पर आचार्यश्री ने
वहां प्रवचन देने का प्रस्ताव मान्य कर दिया |
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अवसरज्ञ आचार्यश्री ने अपने प्रवचन का प्रारम्भ तमिल भाषा के
एक वाक्य से किया -
" एनक्कु तमिल पेस तेरिन्दु इरुन्दाल मिक संतोष इरन्दु इरुक्कुम |
आनाल एनक्कू तमिल तेरीयाद |
आदांनाल हिंदी यिलं पेसूकिरन |"
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इतना सुनते ही छात्रों की ओर से आवाज़ आई -
आप हिंदी में बोलें |
हम आपको हिंदी में ही सुनना चाहेंगे |
विश्वविद्दालय के प्रांगण में हिंदी में प्रवचन करना
पहली और आश्चर्यजनक घटना थी |
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वस्तुतः जहां आत्मा बोलती है,
वहां भाषा मूक बन जाती है |
आचार्यश्री वातावरण को कैसे मोड़ देना चाहिए तथा
किस समय कौन से उपाय को काम में लेना चाहिए,
इसे बखूबी जानते थे |
यही उनके करिश्माई नेतृत्व की विशिष्टता थी |
आदांनाल हिंदी यिलं पेसूकिरन !!
भाषा बाधक नहीं बनी !!!
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तमिलनाडु यात्रा के पूर्व मोरारजी देसाई ने आचार्यश्री को निवेदन किया -
दक्षिण में हिंदी का विरोध प्रखर हो रहा है |
इसलिए आप वहां कोई सार्वजनिक कार्यक्रम न करें |
कहीं ऐसा न हो कि
आपका वहां हिंदी भाषण सुनकर छात्र भड़क उठे |
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अन्नामलै विश्वविद्दालय के प्रोफेसरों के अनुरोध पर आचार्यश्री ने
वहां प्रवचन देने का प्रस्ताव मान्य कर दिया |
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अवसरज्ञ आचार्यश्री ने अपने प्रवचन का प्रारम्भ तमिल भाषा के
एक वाक्य से किया -
" एनक्कु तमिल पेस तेरिन्दु इरुन्दाल मिक संतोष इरन्दु इरुक्कुम |
आनाल एनक्कू तमिल तेरीयाद |
आदांनाल हिंदी यिलं पेसूकिरन |"
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इतना सुनते ही छात्रों की ओर से आवाज़ आई -
आप हिंदी में बोलें |
हम आपको हिंदी में ही सुनना चाहेंगे |
विश्वविद्दालय के प्रांगण में हिंदी में प्रवचन करना
पहली और आश्चर्यजनक घटना थी |
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वस्तुतः जहां आत्मा बोलती है,
वहां भाषा मूक बन जाती है |
आचार्यश्री वातावरण को कैसे मोड़ देना चाहिए तथा
किस समय कौन से उपाय को काम में लेना चाहिए,
इसे बखूबी जानते थे |
यही उनके करिश्माई नेतृत्व की विशिष्टता थी |
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