Saturday, July 13, 2013

कालूगणी से आपका कभी साक्षात्कार हुआ ?

कालूगणी से आपका कभी साक्षात्कार हुआ ?
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लाडनूं-प्रवास के दौरान एक रुसी विद्वान गुरुदेव की सन्निधि में पहुंचा |
उसने गुरुदेव से पूछा -
आपके शक्ति-केंद्र पूज्य कालूगणी हैं तो
क्या अब भी आपका सम्बन्ध उनसे जुड़ा हुआ है ?
गुरुदेव ने मुस्कराते हुए कहा -
ऐसा कोई भी दिन खाली नहीं जाता
जब वे मेरी स्मृति में न आएं |
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पुनः उस रुसी भाई ने जिज्ञासा प्रस्तुत की -
कालूगणी से आपका कभी साक्षात्कार हुआ ?
गुरुदेव ने उसकी आँखों में झांकते हुए उत्तर दिया --
प्रत्यक्ष तो नहीं,
पर मुझे ऐसा लगता है कि
वे मेरे हर कार्य में सहयोगी रहते हैं |
उनसे मुझे हर पल प्रेरणा और ऊर्जा मिलती रहती है |
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यह सुनकर वह विदेशी भाई भावविभोर होकर बोला --
गुरुदेव ! आपकी भक्ति और आस्था देखकर मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि
कालूगणी से आपका अनेक भवों (जन्मों ) का सम्बन्ध है |
क्या आपको भी ऐसा आभास होता है ?
गुरुदेव ने स्वीकृति में अपना सिर हिला दिया |
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प्रस्तुत वार्तालाप से स्पष्ट है कि
पूज्य गुरुदेव के मन में अपने गुरु के प्रति
कितनी श्रद्धा, लगाव एवं भक्ति थी |

 

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