Saturday, July 13, 2013

सर्वोत्तम प्रसंग

सर्वोत्तम प्रसंग
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मद्रास !
२८ सितम्बर १९६८ !!
दो जर्मन विद्वान विश्व भ्रमण के लक्ष्य से मद्रास आये |
तेरापंथ भवन के आसपास खड़ी भीड़ को देखकर उनमें जिज्ञासा जगी |
जानकारी प्राप्त होने के बाद वे भवन में दर्शन करने आये |
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दो-तीन सत्रों में हुई बातचीत के दौरान वे बोले -
आचार्यश्री ! आपसे मिलना हमारे जीवन की अदभुत घटना है |
हमें मालूम ही नहीं था कि
इतने बड़े धर्माचार्य से मिलना इतना सरल है |
हमारे पोप से मिलने के लिए वर्षों तक इंतज़ार करना पड़ता है |
फिर हमारे जैसे साधारण व्यक्ति तो उनसे मिल ही नहीं पाते |
हमारी इस यात्रा का सर्वोत्तम प्रसंग आपसे मिलने का है |
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नोट - इस तस्वीर में "भारत-रत्न" चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी की सेवा-दर्शन करते हुए परिलक्षित हैं |
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राजाजी भारतवर्ष के अंतिम गवर्नर-जनरल थे,
कांग्रेस के बड़े नेता, मद्रास स्टेट के मुख्यमंत्री,
भारत वर्ष के गृहमंत्री और पश्चिम बंगाल के गवर्नर पद पर भी रहे |

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