Saturday, July 13, 2013

आर्जव-साधना

आर्जव-साधना
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स्वयं फंसना भोलापन है और
औरों को फंसाना छल है |
सरल व्यक्ति इन दोनों स्थितियों से ऊपर होता है |
पूज्य गुरुदेव श्री तुलसी की आर्जव-साधना प्रकर्ष पर थी |
अनेक बार उनकी ऋजुता का लोग दुरूपयोग कर लेते |
पर वे सरलता को पवित्रता एवं आत्मालोचन का अपरिहार्य अंग मानते थे |
सरलता की प्रेरणा देने का उनका तरीका भी अदभुत था |
किसी भी घटना प्रसंग को माध्यम बनाकर वे जनता को
सरल एवं पवित्र जीवन जीने की प्रेरणा दे देते थे |

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