बौद्ध भिक्षु की भावना !!!
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२ फरवरी १९७१
बीदासर
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युगप्रधान सम्मान समारोह में सुप्रसिद्ध विचारक एवं साहित्यकार बौद्ध भिक्षु
श्री भदंत आनंद कौशल्यायन ने अपने अभिभाषण में कहा -
* महान व्यक्ति जिस कुल में जन्म लेता है,
वह कुल धन्य बन जाता है |
* जिस ग्राम या राष्ट्र में जन्म लेता है,
वह ग्राम और राष्ट्र कृतार्थ हो जाता है |
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आचार्य श्री आज अपने कर्तृत्व और व्यक्तित्व से
'युगप्रधान' आचार्य के रूप में सम्मानित किये जा रहे हैं |
इस प्रसंग में मैं बहुत प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ |
मेरी यह प्रसन्नता और अधिक हो जायेगी,
जब हमारे देश में,
हमारी बौद्ध परम्परा में भी आचार्य तुलसी जैसा व्यक्ति पैदा होगा |
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२ फरवरी १९७१
बीदासर
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युगप्रधान सम्मान समारोह में सुप्रसिद्ध विचारक एवं साहित्यकार बौद्ध भिक्षु
श्री भदंत आनंद कौशल्यायन ने अपने अभिभाषण में कहा -
* महान व्यक्ति जिस कुल में जन्म लेता है,
वह कुल धन्य बन जाता है |
* जिस ग्राम या राष्ट्र में जन्म लेता है,
वह ग्राम और राष्ट्र कृतार्थ हो जाता है |
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आचार्य श्री आज अपने कर्तृत्व और व्यक्तित्व से
'युगप्रधान' आचार्य के रूप में सम्मानित किये जा रहे हैं |
इस प्रसंग में मैं बहुत प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ |
मेरी यह प्रसन्नता और अधिक हो जायेगी,
जब हमारे देश में,
हमारी बौद्ध परम्परा में भी आचार्य तुलसी जैसा व्यक्ति पैदा होगा |
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