Friday, July 12, 2013

जयपुर बाल दीक्षा विरोध

बाह्य संघर्ष का प्रवेश द्वार बना - -
जयपुर बाल दीक्षा विरोध |
भयंकर भूचाल आया |
सरकार तक ने विरोधी समिति को शह दी |
यह स्वर जोर-शोर से प्रसृत होने लगा -
" किसी भी हालत में दीक्षा नहीं होगी |
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उस समय आचार्य तुलसी पहली बार जयपुर पधारे थे |
संपर्क सूत्र अत्यल्प थे |
फिर भी उनका संकल्प दृढ था |
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इधर महिलाओं का हौसला बढ़ा |
उन्होंने पुरे जोश-खरोश के साथ जुलूस निकाला |
जिसकी प्रतिक्रया अनुकूल रही |
वस्तुस्थिति का आकलन करने के बाद यह बात
प्रखर चिंतकों एवं शीर्ष नेताओं के समझ में आ गई कि
विरोध दीक्षा का नहीं है |
वह तो एक माध्यम है |
वस्तुतः विरोध आचार्य तुलसी के प्रभावी व्यक्तित्व एवं
लोक कल्याणकारी प्रवृत्तियों का है |
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* धीरे-धीरे विरोध के बादल छंटे |
कुहासा हटा और सत्य का सूर्य पुरी दीप्ति के साथ चमकने लगा | 

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