केक काटना, मोमबत्तियां जलाना और बुझाना,
गुब्बारे फोड़ना आदि जैन क्या,
भारतीय संस्कृति के भी अनुकूल नहीं है ?
फिर भी आधुनिकता के नाम पर यह सब चलता है |
क्या यह आंख मूंदकर चलने का अभिनय तो नहीं है ?
गुब्बारे फोड़ना आदि जैन क्या,
भारतीय संस्कृति के भी अनुकूल नहीं है ?
फिर भी आधुनिकता के नाम पर यह सब चलता है |
क्या यह आंख मूंदकर चलने का अभिनय तो नहीं है ?
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