श्रद्धा !
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श्रद्धा को परिभाषित करते हुए पूज्य गुरुदेव कहते हैं - -
जिस साधना-पथ को चुन लिया,
उस पर कदम बढाते समय हज़ार कठिनाइयां उपस्थित हो जाएं,
पर एक क्षण के लिए भी मानस विचलित न हो,
इसका नाम है -- --
श्रद्धा !
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श्रद्धा को परिभाषित करते हुए पूज्य गुरुदेव कहते हैं - -
जिस साधना-पथ को चुन लिया,
उस पर कदम बढाते समय हज़ार कठिनाइयां उपस्थित हो जाएं,
पर एक क्षण के लिए भी मानस विचलित न हो,
इसका नाम है -- --
श्रद्धा !
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