कलकत्ता विश्वविद्दालय के विभागाध्यक्ष
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सतकौडी मुखर्जी गुरुदेव के
सरल एवं निश्छल व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए |
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गुरुदेव से हुई मुलाक़ात को उन्होंने इन शब्दों में प्रकट किया -
आचार्य तुलसी की निश्छलता और सरलता के सम्मुख
मैंने स्वयं को शिशु रूप में पाया |
लगा कि उनकी पैनी दृष्टि हम लोगों के अंतस्तल को भेदकर
हमारी कुटिलता और कलुषता को प्रक्षालित कर रही है |
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विशाल धर्मसंघ का एकछत्र नेतृत्व करते हुए भी पूज्य गुरुदेव ने
बचपन जैसी सरलता और निश्छलता को सुरक्षित रखा,
यह उनकी विशिष्ट साधना का परिणाम था |
- आचार्य श्री महाप्रज्ञजी
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